अशोक विश्वकर्मा
गाडरवारा! विश्व प्रसिद्ध दार्शनिक एवं आध्यात्मिक रजनीश ओशो के 11 दिसंबर जन्मोत्सव अवसर पर स्थानीय ओशो लीला आश्रम में तीन दिवसीय ध्यान शिविर स्वामी ध्यान आकाश के सानिध्य में आयोजित किया गयाl उक्त ध्यान शिविर के दौरान स्थानीय एवं बाहर के ओशो संन्यासियों ने ओशो की विभिन्न ध्यान विधियों का साक्षी और आनंद भाव के साथ रसपान कियाl केक काटकर मनाया जन्मदिन… प्राकृतिक वादियों में स्थित ओशो लीला आश्रम में 11 दिसंबर ओशो जन्म महोत्सव अवसर पर ओशो सन्यासियों एवं अनुयायियों द्वारा हर्ष उल्लास के साथ संध्याकाल कुंडलिनी ध्यान उपरांत केक काटकर ओशो आए आनंद लाए जय ओशो के गगन भे दी स्लोगन गुंजित हुएl इस अवसर पर ओशो लीला आश्रम के मीडिया प्रभारी स्वामी राजेश नीरस ने उक्त शिविर की जानकारी देते हुए बताया कि ओशो के जन्म महोत्सव 11 दिसंबर से पूर्व एवं 19 जनवरी मृत्यु महोत्सव तक देश के विभिन्न स्थानों के अलावा विदेश के ओशो सन्यासियों का बड़ी संख्या में ओशो की क्रीडा स्थली गाडरवारा तथा ओशो लीला आश्रम में आवागमन बना रहता है जो ओशो सन्यासियों के लिए आनंद समागम महोत्सव से कम नहीं होताl । ओशो की जन्म एवं क्रीड़ास्थली सदैव दर्शनीय रहेगी… रजनीश ओशो का जन्म वैसे तो रायसेन जिले के छोटे से कस्बा कुचवाडा मैं 11 दिसंबर 1931 को ननिहाल में हुआ करीब 7 वर्ष की आयु में माता-पिता एवं परिवार मे गाडरवारा आए जिनकी प्राथमिक शिक्षा गंज प्राथमिक शाला माध्यमिक एवं हायर सेकेंडरी शिक्षा आदर्श स्कूल में प्राप्त की सार्वजनिक पुस्तकालय जहां से ओशो ने गहन अध्ययन किया अध्ययन की गई एवं अमूल्य किताबें पुस्तकालय में संरक्षित कर रखी गई है उनकी आध्यात्मिक यात्रा बाल्य एवं किशोरावस्था से ही आरंभ हो गई थी शक्कर नदी रामघाट आदि मृत्यु प्रयोग क्रीडा लीला अद्वैत की ओर ले जाने लगी जो बाद में विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक के रूप में सामने आईl गाडरवारा में ओशो से संबंधित स्थल बाहर देश-विदेश के ओशो सन्यासियों के लिए दर्शनीय होते हैं और वे सभी अहो भाव से कृतज्ञता जाहिर करते हैं इन दिनों नगर में विभिन्न शहरों तथा देश-विदेश के ओशो के सन्यासियों का बड़ी संख्या में आवा गमन बना हुआ है और वह ओशो, ओशो से संबंधित दर्शनीय स्थलों को भ्रमण करते हुए निहार रहे हैंl
